छोटी दिवाली, जिसे नरक चतुर्दशी के नाम से भी जाना जाता है, दीपावली से एक दिन पहले मनाई जाती है। हिंदू धर्म में इस त्योहार का विशेष महत्व है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी पत्नी सत्यभामा की सहायता से राक्षस राजा नरकासुर का वध किया था और उसके अत्याचारों से लोगों को मुक्ति दिलाई थी।
नरक चतुर्दशी का त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। इस दिन लोग अपने घरों में दीपक जलाते हैं और दीपावली की तैयारियां करते हैं। कई स्थानों पर सुबह जल्दी उठकर अभ्यंग स्नान करने की भी परंपरा है।
कौन था नरकासुर और क्यों फैलाया था उसने आतंक?
पौराणिक कथाओं के अनुसार, नरकासुर एक शक्तिशाली असुर राजा था, जो प्राग्ज्योतिषपुर नामक राज्य पर शासन करता था। इस स्थान को वर्तमान असम क्षेत्र से जोड़ा जाता है।
मान्यता है कि नरकासुर का जन्म धरती माता यानी भूमिदेवी और भगवान विष्णु के वराह अवतार से हुआ था। शुरुआत में वह एक शक्तिशाली और योग्य राजा था, लेकिन धीरे-धीरे उसे अपनी शक्ति पर घमंड हो गया। वह अपनी ताकत का गलत इस्तेमाल करने लगा और देवताओं, ऋषियों तथा आम लोगों को परेशान करने लगा।
उसके अत्याचार लगातार बढ़ते गए। उसने देवताओं की माता अदिति के कुंडल छीन लिए और 16,100 स्त्रियों को बंदी बनाकर अपने महल में कैद कर लिया। उसके आतंक से स्वर्ग और धरती दोनों जगह भय का माहौल बन गया था।
जब नरकासुर के अत्याचार बहुत बढ़ गए, तब देवताओं ने भगवान श्रीकृष्ण से सहायता मांगी।
भगवान श्रीकृष्ण और सत्यभामा ने किया युद्ध
देवताओं की प्रार्थना सुनकर भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का अंत करने का निर्णय लिया। इस युद्ध में उनकी पत्नी सत्यभामा भी उनके साथ जाने के लिए तैयार हो गईं।
भगवान श्रीकृष्ण गरुड़ पर सवार होकर सत्यभामा के साथ नरकासुर के राज्य की ओर रवाना हुए। जब नरकासुर को उनके आने की खबर मिली, तो उसने अपनी विशाल सेना को युद्ध के लिए तैयार कर दिया।
इसके बाद दोनों पक्षों के बीच भयंकर युद्ध शुरू हो गया।
भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी शक्ति से नरकासुर की सेना को परास्त करना शुरू कर दिया। उन्होंने नरकासुर के शक्तिशाली सेनापति मुर का भी वध किया। इसी कारण भगवान श्रीकृष्ण को मुरारी के नाम से भी जाना जाता है।
अपनी सेना को हारता देखकर नरकासुर स्वयं युद्धभूमि में आ गया। उसने भगवान श्रीकृष्ण पर कई शक्तिशाली अस्त्रों से हमला किया। युद्ध काफी देर तक चलता रहा।
सत्यभामा ने कैसे किया नरकासुर का वध?
युद्ध के दौरान एक ऐसा समय आया जब भगवान श्रीकृष्ण ने मूर्छित होने का अभिनय किया। यह देखकर सत्यभामा क्रोधित हो गईं और उन्होंने नरकासुर पर बाण चला दिया। बाण लगते ही नरकासुर युद्धभूमि में गिर पड़ा और उसका अंत हो गया।
इस घटना के पीछे एक महत्वपूर्ण पौराणिक मान्यता भी है। कहा जाता है कि नरकासुर को वरदान मिला था कि उसकी मृत्यु केवल उसकी माता के हाथों ही होगी। उसकी माता भूमिदेवी थीं और सत्यभामा को भूमिदेवी का अवतार माना जाता है। इसलिए नरकासुर का वध सत्यभामा के हाथों होना तय था।
इस तरह भगवान श्रीकृष्ण और सत्यभामा ने मिलकर नरकासुर के आतंक का अंत किया।
16,100 बंदी स्त्रियों को मिली आजादी
नरकासुर के वध के बाद भगवान श्रीकृष्ण ने उसके महल में कैद 16,100 स्त्रियों को मुक्त कराया। उन्होंने देवताओं की माता अदिति के कुंडल भी वापस दिलाए।
नरकासुर के अंत से देवताओं और आम लोगों को राहत मिली। पौराणिक मान्यता के अनुसार, नरकासुर ने अपनी मृत्यु से पहले भगवान श्रीकृष्ण से इच्छा जताई थी कि उसकी मृत्यु का दिन लोगों के लिए खुशी और उत्सव का दिन बने। भगवान श्रीकृष्ण ने उसकी यह इच्छा स्वीकार कर ली।
छोटी दिवाली पर क्यों जलाए जाते हैं दीपक?
नरकासुर के वध और उसके अत्याचारों से मुक्ति मिलने की खुशी में नरक चतुर्दशी मनाने की परंपरा जुड़ी हुई है। इस दिन घरों में दीपक जलाए जाते हैं। दीपक जलाना अंधकार को दूर करके प्रकाश, खुशियों और सकारात्मकता का स्वागत करने का प्रतीक माना जाता है।
कई राज्यों में इस दिन सुबह सूर्योदय से पहले उठकर अभ्यंग स्नान किया जाता है। इसमें शरीर पर तेल लगाकर पारंपरिक तरीके से स्नान करने की परंपरा है। कुछ क्षेत्रों में इस त्योहार को रूप चौदस के नाम से भी जाना जाता है।
छोटी दिवाली 2026 कब है?
साल 2026 में छोटी दिवाली 8 नवंबर को मनाई जाएगी। यह कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को आती है। इस दिन लोग दीपक जलाकर नरकासुर वध की पौराणिक कथा को याद करते हैं और अगले दिन मनाई जाने वाली मुख्य दिवाली की तैयारियां करते हैं।
छोटी दिवाली का त्योहार हमें यह संदेश देता है कि शक्ति का इस्तेमाल दूसरों को परेशान करने के लिए नहीं, बल्कि उनकी रक्षा और भलाई के लिए करना चाहिए। नरकासुर की कहानी यह भी सिखाती है कि अहंकार और अत्याचार चाहे कितने भी शक्तिशाली क्यों न हों, अंत में सत्य और धर्म की ही जीत होती है।
Read in English: https://www.delhi-magazine.com/society/religious-news/choti-diwali-why-is-narak-chaturdashi-celebrated-know-the-story-of-lord-krishna-and-narakasura/
