सुस्मित फाउंडेशन का यह स्पष्ट विश्वास है कि शिक्षा तक पहुँच केवल कक्षा तक सीमित नहीं होती, बल्कि उसके पहले एक लंबी और जटिल प्रक्रिया होती है—जिसका नाम है सही और पूर्ण दस्तावेज़ीकरण। हमारा अनुभव बताता है कि आज भी बड़ी संख्या में बच्चे केवल इसलिए विद्यालय से बाहर हैं क्योंकि उनके पास उचित दस्तावेज़ उपलब्ध नहीं हैं।
सुस्मित फाउंडेशन बीते कुछ वर्षों से दस्तावेज़ीकरण (Documentation) के क्षेत्र में सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है, ताकि वंचित और ज़रूरतमंद परिवारों को सरकारी योजनाओं, अधिकारों और विशेषकर सरकारी विद्यालयों से जोड़ा जा सके। इसी कार्य को आगे बढ़ाते हुए हमने इसे बच्चों के सरकारी स्कूलों में नामांकन से सीधे जोड़ दिया। हम इसके लिए सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हैं कि अधिकांश प्रक्रियाएँ अब डिजिटल माध्यम से संभव हो पाई हैं, जिससे कई मामलों में अनेक कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं रही और कार्य अपेक्षाकृत सुगम हुआ है।
आज यह बताते हुए संतोष और जिम्मेदारी दोनों का भाव है कि अब तक सुस्मित फाउंडेशन ने प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से 66 बच्चों का विभिन्न सरकारी विद्यालयों में नामांकन पूर्ण कराया है। यह कार्य केवल फॉर्म भरने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक लंबी, धैर्यपूर्ण और जमीनी प्रक्रिया होती है।
हमारे कार्य में शामिल हैं—
- अधूरे या गलत दस्तावेज़ों की पहचान
- दस्तावेज़ों में सुधार और अद्यतन
- विभिन्न सरकारी विभागों से जानकारी प्राप्त करना
- आवेदन प्रक्रिया को सही ढंग से पूरा करना
- और विद्यालय प्रशासन के साथ समन्वय बनाना
कई बार स्थिति और भी जटिल हो जाती है, जब किसी बच्चे या परिवार के पास कोई भी सहायक दस्तावेज़ उपलब्ध नहीं होता। ऐसे मामलों में हमें यह समझने के लिए विभिन्न विभागों के चक्कर लगाने पड़ते हैं कि ऐसे बच्चों के लिए कौन–सा वैकल्पिक मार्ग संभव है। यह कार्य अत्यंत धैर्य, निरंतर फॉलो–अप और स्पष्ट संवाद की माँग करता है।
एक NGO होने के नाते हमारे संसाधन और टीम सीमित हैं। इसलिए कुछ मामलों को पूरा करने में समय लग जाता है, लेकिन हमारा संकल्प अडिग रहता है— कोई भी बच्चा केवल काग़ज़ों के अभाव में शिक्षा से वंचित न रहे।
इस पूरे सफर में हमें लक्ष्मी नगर एवं आसपास के सरकारी विद्यालयों के शिक्षकों और प्रबंधन का अत्यंत सकारात्मक सहयोग मिला है। उन्होंने हमारे प्रयासों को समझा, सहयोग किया और यह स्वीकार किया कि जब दस्तावेज़ व्यवस्थित होते हैं, तो विद्यालयों के लिए भी प्रक्रिया सरल हो जाती है।
हम बच्चों और उनके परिवारों को तीन मूल बातें सिखाने का प्रयास कर रहे हैं—
- सम्मानजनक और सही संवाद का महत्व
- शिक्षा का वास्तविक मूल्य
- सही और पूर्ण दस्तावेज़ों की अनिवार्यता
इसका प्रभाव अब साफ़ दिखाई दे रहा है। वे परिवार, जो स्वयं पढ़े–लिखे नहीं हैं, अक्सर दलालों के जाल में फँस जाते हैं और अपने ही अधिकारों के लिए हज़ारों रुपये खर्च कर देते हैं। सही मार्गदर्शन मिलने पर यही काम बिना आर्थिक शोषण के संभव हो सकता है। हम दृढ़ता से मानते हैं कि विद्यालय में नामांकन न होने का सबसे बड़ा कारण सही दस्तावेज़ों का अभाव है। यदि नागरिक समाज, स्वयंसेवक और NGO मिलकर इस अंतर को पाट सकें, तो यह देश के लिए एक महत्वपूर्ण सामाजिक उपलब्धि होगी।
आने वाले समय में सुस्मित फाउंडेशन का लक्ष्य है—
- एक संगठित और समर्पित कार्यालय की स्थापना
- स्वयंसेवकों का एक नेटवर्क, जो विद्यालय से बाहर रह गए बच्चों की पहचान कर सके
- दस्तावेज़ों की जाँच, सत्यापन और सुधार की एक सतत प्रक्रिया
- और अंततः पात्र बच्चों का सरकारी विद्यालयों में नामांकन सुनिश्चित करना
इस कार्य के लिए हमें कॉरपोरेट संस्थानों और CSR निकायों के सहयोग की आवश्यकता है। यह सहयोग न केवल सरकार के लिए राजस्व और संसाधनों की बचत करेगा, बल्कि देश की सबसे महत्वपूर्ण पूँजी—हमारे बच्चे—को शिक्षा से जोड़कर सुरक्षित करेगा।
यदि हम एक भी बच्चे को सही दस्तावेज़ों के माध्यम से स्कूल तक पहुँचा पाते हैं, तो यह समाज की सामूहिक जीत है।
रोहित मुखर्जी
सुस्मित फाउंडेशन (NGO)
J-109 A, गली नंबर 6, लक्ष्मी नगर, दिल्ली–110092
मो.: +91 97114 43897
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