हाल के वर्षों में कई ईरानी खिलाड़ियों ने अपने देश में खेलते समय आने वाली सामाजिक और राजनीतिक चुनौतियों के बारे में खुलकर बात की है। उन्हीं में से एक नाम है ईरान की पूर्व फुटबॉलर और फुत्सल खिलाड़ी शिवा अमीनी का, जिन्होंने एक महिला खिलाड़ी के रूप में अपने अनुभवों को सार्वजनिक रूप से साझा किया है।
शिवा अमीनी कभी ईरान की महिला राष्ट्रीय फुत्सल टीम की एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी थीं। फुटबॉल के प्रति उनका जुनून और खेल कौशल उन्हें देश की उभरती हुई खिलाड़ियों में शामिल करता था। उस समय ईरान में महिला खेलों को धीरे-धीरे पहचान मिल रही थी।
हालांकि, उनका करियर उस समय अचानक विवादों में आ गया जब विदेश यात्रा के दौरान बिना हिजाब के फुटबॉल खेलते हुए उनकी कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं।
ईरान में महिलाओं के लिए सार्वजनिक जीवन और खेल गतिविधियों में सख्त ड्रेस कोड लागू है, जिसमें हिजाब पहनना अनिवार्य माना जाता है। अमीनी के अनुसार, इन तस्वीरों के वायरल होने के बाद उन्हें अपने खेल करियर में गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ा।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया को दिए गए इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि इस विवाद के बाद उनके लिए ईरान में खेल जारी रखना मुश्किल हो गया। लगातार बढ़ते दबाव और आलोचना के कारण उन्हें अपने भविष्य के बारे में कठिन फैसला लेना पड़ा।
आखिरकार, शिवा अमीनी ने ईरान छोड़ दिया और स्विट्जरलैंड में शरण ली। वहां से उन्होंने महिला खिलाड़ियों की स्थिति के बारे में खुलकर बोलना शुरू किया।
उन्होंने कई बार कहा है कि ईरान में महिला खिलाड़ियों को सीमित अवसर, सख्त नियम और सामाजिक दबाव का सामना करना पड़ता है। इन परिस्थितियों के कारण कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी अपने खेल करियर को आगे बढ़ाने से हतोत्साहित हो जाती हैं।
आज शिवा अमीनी महिला खिलाड़ियों के अधिकारों और समान अवसरों की आवाज उठाने वाली प्रमुख हस्तियों में से एक बन चुकी हैं। अपने इंटरव्यू और सार्वजनिक मंचों के माध्यम से वह दुनिया का ध्यान ईरान में महिला खिलाड़ियों की स्थिति की ओर आकर्षित करने की कोशिश कर रही हैं।
उनकी कहानी खेल जगत में लैंगिक समानता और खिलाड़ियों के अधिकारों पर चल रही वैश्विक बहस को भी एक नया दृष्टिकोण देती है।
