रिसर्च (Research) क्या है? रिसर्च के प्रकार (Types of Research), रिसर्च का प्रोसेस (Research Process)

रिसर्च (Research) क्या है? रिसर्च के प्रकार (Types of Research), रिसर्च का प्रोसेस (Research Process)

रिसर्च (अनुसंधान): एक आसान गाइड

1. रिसर्च के प्रकार (Types of Research) – पूरे विस्तार से

इसे हम ‘काम करने के तरीके’ के आधार पर 4 बड़े हिस्सों में बाँट सकते हैं:

(A) बेसिक रिसर्च (Fundamental Research)

  • क्या है: यह सिर्फ अपनी ‘नॉलेज’ बढ़ाने के लिए की जाती है। इसमें हम कोई समस्या हल नहीं कर रहे होते, बस यह जानना चाहते हैं कि दुनिया कैसे काम करती है।

  • उदाहरण: एक वैज्ञानिक यह रिसर्च करता है कि “तारे क्यों चमकते हैं?” या “इंसान के दिमाग में यादें कैसे बनती हैं?”

  • काम की बात: इससे नए नियम और सिद्धांत (Theories) बनते हैं।

(B) अप्लाइड रिसर्च (Applied Research)

  • क्या है: यह ‘काम की रिसर्च’ है। इसका मकसद किसी खास मुश्किल का हल निकालना है।

  • उदाहरण: “सैमसंग का नया फोन गर्म क्यों हो रहा है?” या “खेती में कीड़े मारने के लिए कौन सी दवाई सबसे अच्छी है?”

  • काम की बात: यह बेसिक रिसर्च से सीखे हुए नियमों को असली दुनिया में लागू करती है।

(C) क्वांटिटेटिव रिसर्च (Quantitative Research – नंबर वाली)

  • क्या है: जहाँ भी गिनती (Numbers) आ जाए, वह यह रिसर्च है। इसमें हम ‘कितने’ और ‘कितना’ का जवाब ढूंढते हैं।

  • उदाहरण: “100 में से 80 लोग चाय के शौकीन हैं।” या “कोल्ड ड्रिंक पीने से वजन 2 किलो बढ़ जाता है।”

  • काम की बात: इसमें सर्वे और ग्राफ का बहुत इस्तेमाल होता है। यह सबके लिए एक जैसा रिजल्ट देती है।

(D) क्वालिटेटिव रिसर्च (Qualitative Research – गुणों वाली)

  • क्या है: यहाँ नंबरों का काम नहीं है। यहाँ हम ‘क्यों’ और ‘कैसा’ ढूंढते हैं। यह लोगों के व्यवहार और उनकी सोच को समझने के लिए है।

  • उदाहरण: “लोग चाय क्यों पीते हैं? उन्हें कैसा महसूस होता है?” या “एक गरीब इंसान अपनी जिंदगी के बारे में क्या सोचता है?”

  • काम की बात: इसमें हम लोगों से लंबी बातें करते हैं (Interview) और उनकी भावनाओं को समझते हैं।


2. रिसर्च का प्रोसेस (Steps of Research) – कहानी की तरह

अगर आपको एक जासूस की तरह रिसर्च करनी है, तो ये 8 कदम उठाने होंगे:

  1. समस्या चुनना (The Problem): सबसे पहले एक सवाल चुनो।

    • जैसे: “क्या सुबह जल्दी उठने से एग्जाम में नंबर अच्छे आते हैं?”

  2. पुराना रिकॉर्ड देखना (Literature Review): इंटरनेट या किताबों में देखो कि इस सवाल पर पहले क्या काम हुआ है। कहीं आप वही तो नहीं खोज रहे जो कल ही किसी ने खोज लिया?

  3. अंदाजा लगाना (Hypothesis): अपना एक पक्का अंदाजा बनाओ।

    • जैसे: “हाँ, जो बच्चा 5 बजे उठता है, उसके नंबर 10% ज्यादा आते हैं।” (अब इसे साबित करना होगा)।

  4. प्लान बनाना (Research Design): तय करो कि डेटा कहाँ से लाओगे? कितने बच्चों से पूछोगे? कितने दिन तक टेस्ट करोगे?

  5. डेटा जमा करना (Data Collection): अब फील्ड में उतरो। बच्चों से फॉर्म भरवाओ, उनके नंबरों की लिस्ट बनाओ।

  6. डेटा की जांच (Data Analysis): जो लिस्ट मिली, उसे चेक करो। क्या सच में सुबह उठने वालों के नंबर ज्यादा हैं? यहाँ कैलकुलेटर और दिमाग का काम शुरू होता है।

  7. नतीजा निकालना (Conclusion): अब आप पक्का कह सकते हो कि आपका अंदाजा (Hypothesis) सही था या गलत।

  8. सबको बताना (Reporting): अपनी एक फाइल बनाओ और दुनिया को दिखाओ कि आपने क्या नया खोजा।


3. एक अच्छी रिसर्च की पहचान (Features of Good Research)

कैसे पता चलेगा कि रिसर्च असली है या बस टाइम पास?

  • Reliability (भरोसा): अगर मैं आज रिसर्च करूँ और कल आप वही रिसर्च करो, तो रिजल्ट एक जैसा आना चाहिए। (जैसे: 2+2 हमेशा 4 ही होगा)।

  • Validity (सच्चाई): आप जो नापना चाहते थे, वही नापा है या कुछ और? (जैसे: वजन नापना था तो वजन वाली मशीन ही ली, थर्मामीटर नहीं)।

  • Objectivity (निष्पक्षता): इसमें आपकी ‘पसंद-नापसंद’ नहीं आनी चाहिए। जो सच है, वही लिखो। (जैसे: अगर मुझे चाय पसंद है, तो इसका मतलब ये नहीं कि मैं लिख दूँ कि चाय अमृत है)।

  • Systematic (तरीके से): रिसर्च जंप मारकर नहीं होती। स्टेप-1 के बाद स्टेप-2 ही आना चाहिए।

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